📚 Learn Smart | 💻 Explore Technology | 🎯 Crack Exams | 🚀 Build Your Future.

About me

Hi iam Vishnu Shahane 📢 Welcome to my blog Edulearngk 📈 We share all education perpuse information 📚

Breaking news

Friday, July 31, 2026

रामधारी सिंह ' दिनकर ' की कविता

रश्मिरथी
सच्च है, विपत्ति जब अति है, कायर को ही दहलती है, सुरमा नहीं विचलित होते, क्षण एक नहीं धीरज खोते, विघ्नों को गले लगाते है, काँटो में राह बनाते है| मुख से न कभी उफ़ कहते है, संकट का चरण न गहते है, जो आ पड़ता सब सहते है, उद्योग-निरत नित रहते है, शूलों का मूल नसाने को, बढ़ खुद विपत्ति पर छाने को| है कौन विघ्न ऐसा जग में, टिक सके वीर नर के मग में ? खम थोक ठेलता है जब नर,पर्वत के जाते पांव उखड़ | मानव जब जोर लगता है, पत्थर पानी बन जाता है| गुण बड़े एक से एक प्रखर, है छिपे मानवों के भीतर, मेहंदी मैं जैसे लाली हो, वर्तिका - बीच उजियाली हो | बत्ती जो नहीं जलता है; रोशनी नहीं वह पता है | पीसा जाता जब इशू - दंड, झरती रस की धारा अखंड, मेहंदी जब सहती है प्रहार, बनती लालनाओं का सिंगार, जब फूल पिरोए जाते है, हम उनको गले लगाते है | वसुधा का नेता कौन हुआ? भूखंड - विजेता को हुआ? अतुलित यश - करता कौन हुआ? नव धर्म प्रणेता कोण हुआ? जिसने न कभी आराम किया, विघ्नों में रहकर नाम किया | जब विघ्न सामने आते है, सोते से हम जागते है, मन को मरोड़ते हैं पल - पल, तन को झंझोरते हैं पल - पल | सत्पथ की और लगाकर ही, जाते है हमें जगाकर ही | वाटिका और वन एक नहीं, आराम और रंग एक नहीं, वर्षा, अंधड़, आतप अखंड, पौरुष के है सदा प्रचंड | वन में प्रसून तो खिलते है, बागों में शाल न मिले है| कांकरिया जिनकी सेज सुघर,छाया देता केवल अम्बर, विपदाएं दूध पिलाती है, लोरी आँधियाँ सुनाती है| जो लाक्षा - ग्रह में जलते हैं, वे ही शर्मा निकलते हैं| बढ़कर विपत्तियों पर छा जा, मेरे किशोर! मेरे कान्हा! जीवन का रस छन जाने दे, तन को पत्थर बन जाने दे | तू स्वयं तेज भयकरी हैं,क्या कर सकती चिंगारी हैं?

No comments:

Post a Comment